गुरुवार, 24 सितंबर 2015

हमारी कुल देवी हैं या नहीं??

वैष्णव चतु:सम्प्रदाय में यह  विगत कई वर्षों से मैं भ्रम की स्थिति महसुस कर रहा हूं कि  हमारी कुल देवी हैं या नहीं??
आक्षेप यह भी किया जाता है कि हर ब्राह्मण नवदुर्गा में से किसी एक शक्ति को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजता है, परंतु वैष्णव ब्राह्मण किसी भी दुर्गा को अपनी कुलदेवी के रूप में नहीं पूजते।
यही मूल फर्क है सैद्धांतिक रूप से वैष्णव, शैव और शक्ति उपासक में।
यदि श्री का अर्थ शक्ति से लिया जाय तो वैष्णव को शक्ति हीन 
कभी नहीं  कहा जा सकता क्योंकि श्री लक्ष्मीजी, श्री सीताजी, श्री राधाजी, श्री रुक्मिणी जी आदि वैष्णव देवियां वैष्णवों की शक्तियां हैं।
ये देवियां वैष्णव इष्ट देवों श्री विष्णु भगवान तथा उनके रामकृष्णादि अवतारों की अभिन्न शक्तियाँ है और उनकी सेवा पूजा भी इन्हीं इष्ट देवों के साथ नित्य प्रति कम से कम दिन में दो बार होती ही है।
अतः वैष्णवों पर इष्ट देवी न होने का आक्षेप झूठा है।
हालाँकि इन देवियों की स्वतंत्र रूप से या अकेली सेवा पूजा करने का कोई विधान वैष्णव शास्त्रों में नहीं है, अतः मुख्य और एकल रूप या स्वतंत्र रूप से इनकी सेवा पूजा वैष्णव नहीं करते बल्कि ठाकुर के साथ युगल सेवा पूजा करते हैं।
जय माराज सा🙏